दतिया की सियासत में बड़ा खुलासा! पूर्व विधायक का दावा- ‘भीतरघात और सांठगांठ से उपचुनाव रुकवाने की थी कोशिश’
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दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना से ठीक 24 घंटे पहले कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने रविवार को कई बड़े आरोप लगाया था। उन्होंने न सिर्फ पार्टी के भीतरघात की बात कही, बल्कि नए विधायक घनश्याम सिंह और भाजपा के दिग्गज डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बीच सांठगांठ का भी दावा किया। भारती का कहना है कि दतिया की राजनीति में उनका मकसद एक व्यक्ति के दबदबे को खत्म करना था और उसमें वे सफल हुए।
'मुझे फर्जी केस में फंसाकर अयोग्य कराया गया'
निष्कासन पर सवाल के जवाब में भारती ने कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाए जाने से गुरेज नहीं है। 2023 में जनता ने फैसला सुना दिया था। मुझे फर्जी केस में फंसाकर अयोग्य कराया गया। लेकिन मेरी लड़ाई खत्म नहीं हुई। विधायक की कुर्सी बड़ी नहीं है, दतिया की सियासत बदलना बड़ा है। सबसे बड़ा आरोप उन्होंने नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह पर लगाया। भारती के अनुसार, जब उन्होंने डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज का केस चुनाव आयोग में दायर किया था, तब गवाह के तौर पर घनश्याम सिंह का नाम दिया गया था। लेकिन उन्होंने कोर्ट में बयान देने से इनकार कर दिया।
आज भी वे डॉ. मिश्रा की तारीफ करते हैं। मुझे पूरा शक है कि वे उनके इशारे पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि वर्षों तक दतिया से दूर रहने वाले और लगातार चुनाव हारने वाले व्यक्ति को अचानक टिकट मिल गया। भारती ने सबसे चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो उसी समय डॉ. नरोत्तम मिश्रा की टिकट कट गई थी।
भारती ने कहा कि मेरे वकील के पास उनके दो वकील आए। ऑफर था कि सुप्रीम कोर्ट से स्टे दिलवा देंगे, आप सिर्फ तकनीकी आपत्ति हटवा दीजिए। उनका मकसद चुनाव टलवाना था। कहा गया कि आप ढाई साल विधायक रहिए। मैंने साफ मना कर दिया। जरूरत पड़ी तो उन वकीलों के नाम भी बताऊंगा। भारती ने कहा कि पार्टी नेताओं ने उनसे चुनाव न लड़ने की बात की थी। उन्होंने खुद भी परिवार के लिए टिकट नहीं मांगा और सुझाव दिया कि किसी ओबीसी चेहरे को मौका दिया जाए।
'इतनी जल्दी में फैसला किसके दबाव में हुआ'?
जैसे ही डॉ. मिश्रा की टिकट कटी, घनश्याम सिंह मैदान में आ गए। लगता है उन्हें पहले से भरोसा दिलाया गया था कि मदद मिलेगी। निष्कासन की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए भारती ने कहा कि कांग्रेस के संविधान में अनुशासन समिति और सुनवाई का प्रावधान है। मुझे न नोटिस मिला, न पक्ष रखने का मौका। इतनी जल्दी में फैसला किसके दबाव में हुआ, इसका जवाब आलाकमान दे।
भारती का आरोप है कि दतिया में कांग्रेस के अंदर ही दो तरह के लोग हैं। जो लड़े, वे जेल गए, आर्थिक नुकसान उठाया। लेकिन कुछ लोग हर बार बच जाते हैं। जनता सब समझ रही है कि असली संघर्ष किसने किया। उपचुनाव में कांग्रेस की जीत पर उन्होंने कहा कि यह उनकी 2009 से चली आ रही लड़ाई का नतीजा है। घनश्याम सिंह का इसमें कोई योगदान नहीं। मजबूत भाजपा नेता को हराने का काम जमीनी कार्यकर्ताओं ने किया।



