EPFO में हिन्दी पखवाड़े का रंग: कर्मचारियों ने कलम से लेकर सुरों तक दिखाई प्रतिभा
14 से 29 सितंबर तक चले आयोजन में निबंध से लेकर कंप्यूटर पर हिन्दी प्रयोग तक हुईं प्रतियोगिताएं; समापन समारोह में कर्मचारियों की गीत-संगीत प्रस्तुतियों ने बांधा समां, विजेताओं को किया गया सम्मानित

प्रदीप मैथिल, भोपाल। दफ्तर में आमतौर पर फाइलों, नोटशीट और सरकारी कामकाज के बीच व्यस्त रहने वाले कर्मचारी जब मंच पर पहुंचे तो माहौल कुछ अलग था। किसी ने अपनी लेखन प्रतिभा दिखाई तो किसी ने विचारों को शब्दों में उतारा और किसी ने गीत-संगीत से श्रोताओं का दिल जीत लिया। मौका था कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के हिन्दी पखवाड़े का।
EPFO के आंचलिक कार्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में 14 से 29 सितंबर 2026 तक हिन्दी पखवाड़ा मनाया गया। पखवाड़े के दौरान हिन्दी के कार्यालयीन प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ कर्मचारियों की रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों ने इनमें भाग लिया।

नोटशीट से मंच तक, कर्मचारियों ने दिखाए कई रंग
हिन्दी पखवाड़े की खास बात यह रही कि आयोजन केवल औपचारिक भाषणों तक सीमित नहीं रहा। कर्मचारियों को अलग-अलग प्रतियोगिताओं के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
निबंध लेखन, टिप्पणी आलेखन, विचार अभिव्यक्ति, राजभाषा सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर पर हिन्दी का प्रयोग और चित्र देखकर कहानी लिखो जैसी प्रतियोगिताओं में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
इन प्रतियोगिताओं में कहीं लेखन की क्षमता परखी गई तो कहीं हिन्दी भाषा के ज्ञान और कार्यालयीन कामकाज में उसके तकनीकी प्रयोग को लेकर प्रतिभागियों ने अपनी दक्षता दिखाई।
पखवाड़े की शुरुआत में हिन्दी के अधिक प्रयोग का संदेश
हिन्दी पखवाड़े के आरंभ में अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त और क्षेत्रीय आयुक्त की ओर से अपील जारी की गई। इसमें कार्यालयीन कामकाज में राजभाषा हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया गया।
अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया गया कि वे अपने दैनिक कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाएं और राजभाषा को कामकाज का प्रभावी माध्यम बनाएं।
जब सरकारी कर्मचारी बने कलाकार
पखवाड़े का सबसे दिलचस्प पहलू इसका समापन समारोह रहा। 29 सितंबर को शाम 4 बजे कार्यालय परिसर में आयोजित समारोह में गीत-संगीत संध्या रखी गई।
मंच पर कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारी ही कलाकार की भूमिका में नजर आए। किसी ने गीत प्रस्तुत किया तो किसी ने संगीत के जरिए माहौल बनाया। कार्यालय की प्रतिभाओं की प्रस्तुतियों ने मौजूद श्रोताओं को कार्यक्रम से जोड़े रखा।
गीत-संगीत ने बदला कार्यालय का माहौल
रोजमर्रा के सरकारी कामकाज से अलग इस शाम में कर्मचारियों का दूसरा पक्ष सामने आया। फाइलों और कार्यालयीन जिम्मेदारियों के बीच अपनी कला को समय देने वाले कर्मचारियों को मंच मिला।
गीत-संगीत की प्रस्तुतियों के बीच सहकर्मियों ने अपने साथियों का उत्साह बढ़ाया। इससे समापन समारोह सिर्फ पुरस्कार वितरण तक सीमित न रहकर कर्मचारियों के लिए एक यादगार आयोजन बन गया।
प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार
समापन समारोह में हिन्दी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा राजभाषा प्रोत्साहन योजना के विजेताओं को भी समारोह में पुरस्कार प्रदान किए गए। विजेताओं के सम्मान के साथ उन कर्मचारियों का उत्साह भी बढ़ा, जिन्होंने प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी की।
छह प्रतियोगिताओं ने बढ़ाई भागीदारी
पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की भागीदारी रही। अलग-अलग प्रकार की प्रतियोगिताएं रखने से कर्मचारियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार मंच मिला।
निबंध और टिप्पणी लेखन ने जहां लेखन क्षमता को सामने रखा, वहीं विचार अभिव्यक्ति ने बोलने और विचार रखने का अवसर दिया। राजभाषा सामान्य ज्ञान ने हिन्दी से जुड़े ज्ञान को परखा और कंप्यूटर पर हिन्दी प्रयोग ने तकनीक के साथ भाषा के इस्तेमाल को केंद्र में रखा।
अध्यक्षता अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त गौतम ने की
समापन समारोह की अध्यक्षता अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री गौतम ने की। उनकी अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
समारोह में हिन्दी के कार्यालयीन प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ कर्मचारियों की रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का संदेश भी सामने आया।
भाषा के साथ प्रतिभाओं को भी मिला मंच
EPFO के हिन्दी पखवाड़े का आयोजन एक तरफ कार्यालयीन कामकाज में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने की पहल रहा, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने का अवसर भी बना।
14 सितंबर से शुरू हुआ पखवाड़ा 29 सितंबर की गीत-संगीत से सजी शाम और पुरस्कार वितरण के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान हिन्दी सिर्फ कार्यालय की भाषा नहीं रही, बल्कि प्रतियोगिताओं, विचारों, कहानियों और गीतों के जरिए कर्मचारियों की रचनात्मकता का माध्यम भी बनी।



