GST Rule 86B में फंसे व्यापारियों को राहत की उम्मीद, प्रधान आयुक्त बोलीं- रिफंड के हकदार हैं व्यापारी
टैक्स लॉ बार एसोसिएशन ने CGST भोपाल की प्रधान आयुक्त को सौंपा ज्ञापन; 50 लाख रुपए से अधिक मासिक बिक्री पर 1% नकद टैक्स जमा करने की शर्त से जुड़े मामलों में ब्याज-पेनल्टी और रिफंड का मुद्दा उठाया

प्रदीप मैथिल, भोपाल, 1 अक्टूबर। जीएसटी के रूल 86B के तहत टैक्स का 1% हिस्सा नकद जमा नहीं करने के कारण जांच और ब्याज-पेनल्टी की कार्रवाई का सामना कर रहे व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को CGST भोपाल की प्रधान आयुक्त एन. पद्मश्री से मुलाकात कर ऐसे मामलों में व्यापारियों की परेशानी उठाई। एसोसिएशन के अनुसार प्रधान आयुक्त ने कहा कि संबंधित मामलों में व्यापारी रिफंड पाने के हकदार हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नियम के तहत आयुक्त को जांच के बाद पात्र व्यापारी को 1% नकद भुगतान की शर्त से छूट देने का अधिकार है।
एसोसिएशन ने ज्ञापन में मांग की कि जिन मामलों में सरकार को पूरा टैक्स मिल चुका है और केवल भुगतान का तरीका गलत रहा है, उन्हें टैक्स चोरी का मामला मानने के बजाय उचित कानूनी प्रावधानों के तहत देखा जाए। साथ ही, यदि व्यापारी दोबारा 1% टैक्स नकद में जमा करता है, तो पहले इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जमा की गई राशि का रिफंड जल्द दिया जाए।
50 लाख रुपए से अधिक मासिक बिक्री पर क्या है नियम?
जीएसटी के रूल 86B के अनुसार, निर्धारित शर्तों के अधीन जिन पंजीकृत कारोबारियों का एक महीने में कर योग्य कारोबार 50 लाख रुपए से अधिक होता है, उन्हें अपने आउटपुट टैक्स दायित्व का कम से कम 1% नकद भुगतान करना होता है। इस नियम में कुछ अपवाद और छूट के प्रावधान भी हैं।
एसोसिएशन के अनुसार, कई व्यापारियों को नियम की जानकारी नहीं थी या अनजाने में उन्होंने पूरा टैक्स इनपुट टैक्स क्रेडिट के माध्यम से जमा कर दिया। इस स्थिति में टैक्स सरकार तक पहुंच गया, लेकिन निर्धारित 1% नकद भुगतान की शर्त पूरी नहीं हुई।
टैक्स जमा होने के बाद भी जांच और पेनल्टी का सामना
टैक्स लॉ बार एसोसिएशन ने बताया कि जांच और ऑडिट के दौरान कुछ मामलों में विभागीय अधिकारी इस तरह की चूक को जीएसटी कानून की धारा 74 के तहत देख रहे हैं। इसके चलते व्यापारियों से ब्याज और पेनल्टी की मांग किए जाने की शिकायत है।
एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे मामलों में यदि टैक्स छिपाने या गलत जानकारी देने की मंशा नहीं थी और पूरा टैक्स रिटर्न में घोषित कर जमा किया जा चुका है, तो केवल भुगतान के तरीके में हुई गलती को टैक्स चोरी के समान नहीं माना जाना चाहिए।
धारा 74 की जगह धारा 73 में कार्रवाई की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिन मामलों में धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत जानकारी या टैक्स छिपाने का इरादा नहीं है, उनमें धारा 74 के बजाय धारा 73 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई पर विचार किया जाए।
एसोसिएशन के अनुसार, जब सरकार को पूरा टैक्स मिल चुका हो और विवाद केवल 1% नकद भुगतान की शर्त से जुड़ा हो, तो मामले की प्रकृति और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में ब्याज और पेनल्टी की मांग पर भी तथ्यों तथा लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर विचार होना चाहिए।
दोबारा नकद टैक्स जमा करने पर पहले जमा राशि का रिफंड मिले
प्रतिनिधिमंडल ने रिफंड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। एसोसिएशन के अनुसार, यदि कोई व्यापारी नियम का पालन करते हुए संबंधित 1% टैक्स दोबारा नकद में जमा करता है, तो पहले ITC के जरिए जमा की गई राशि के रिफंड की प्रक्रिया भी समयबद्ध होनी चाहिए।
व्यापारियों की चिंता है कि एक ही टैक्स दायित्व के संबंध में भुगतान दोबारा करने की स्थिति में उनकी कार्यशील पूंजी फंस सकती है। ऐसे मामलों में रिफंड मिलने में देरी कारोबार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल सकती है।
आयुक्त को छूट देने का अधिकार, हर आवेदन की होगी जांच
टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, प्रधान आयुक्त एन. पद्मश्री ने बताया कि रूल 86B में आयुक्त को यह अधिकार दिया गया है कि जांच के बाद किसी व्यापारी पर 1% नकद भुगतान की शर्त लागू न रखने का निर्णय लिया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे कई आवेदनों पर पहले ही विचार किया जा चुका है। आगे आने वाले आवेदनों पर भी प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद फैसला लिया जाएगा।
इससे संबंधित व्यापारियों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वे अपने कारोबार, टैक्स भुगतान, रिटर्न और लागू छूट की शर्तों से जुड़े दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत करें।
एसोसिएशन बोला- शुरुआत में ही सुलझ सकते हैं विवाद
टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि विभाग का सकारात्मक रुख ऐसे मामलों में विवाद कम करने में मदद कर सकता है। यदि पात्र मामलों की जांच समय पर हो और उचित निर्णय लिया जाए, तो कई विवाद अपील और लंबी कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचने से पहले ही सुलझ सकते हैं।
एसोसिएशन का मानना है कि इससे व्यापारियों को अनावश्यक मुकदमेबाजी और अतिरिक्त खर्च से राहत मिलने की संभावना है।
प्रतिनिधिमंडल में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
CGST भोपाल की प्रधान आयुक्त से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज पारख, सचिव धीरज अग्रवाल, वरिष्ठ कर सलाहकार भूपेश खुराफिया, एडवोकेट पलाश खुरापिया, जयंत जोशी और सीए विकास अग्रवाल उपस्थित रहे।
व्यापारियों के लिए क्या है अहम?
रूल 86B से जुड़े मामलों में राहत का लाभ स्वतः सभी व्यापारियों को मिलेगा, ऐसा नहीं माना जाना चाहिए। प्रत्येक मामले में कारोबार की प्रकृति, टैक्स भुगतान का रिकॉर्ड, नियम में उपलब्ध अपवाद और छूट की शर्तें तथा संबंधित कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे।
ऐसे मामलों से जुड़े व्यापारियों के लिए अपने जीएसटी रिटर्न, ITC उपयोग, नकद भुगतान और विभागीय नोटिस के दस्तावेज व्यवस्थित रखना उपयोगी होगा। किसी भी राहत या रिफंड का अंतिम निर्णय संबंधित मामले की जांच और लागू नियमों के अनुसार ही होगा।



